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Tuesday, 11 January 2022

समीक्षा ४४

एक और कविता डॉ रवीन्द्र नारायण पहलवान की

*चाहिए १ -*

बस एक शब्द चाहिए :

पुष्प की खुशबू जैसा
सरोवर की शांति जैसा
नदी की कलकल जैसा
समुद्र की लहरों जैसा
आकाश की ऊंचाई जैसा
अग्नि की गर्माहट जैसा
हवा के झोंके जैसा
सूरज की चमक जैसा
चांद की शीतलता जैसा
तारे की टिमटिमाहट जैसा

बस एक शब्द चाहिए :
चिड़िया की चहचहाहट जैसा
गाय के रँभाने जैसा
घोड़े की शक्ति जैसा
मोर की सुंदरता जैसा

बस एक शब्द चाहिए :
घड़ी के कार्टून जैसा
कलम की निब जैसा
पुस्तक के पृष्ठ जैसा
वृक्ष के फल जैसा

बस एक शब्द चाहिए :
मां की ममता जैसा
पिता की पुकार जैसा
बच्चे की किलकारी जैसा
बहन के गुलाब जैसा
मजदूर की मेहनत जैसा

बस एक शब्द चाहिए :
तुम्हारी मीठी याद जैसा
और तुम्हारी मौजूदगी के एहसास जैसा
बस एक शब्द चाहिए
  डॉ रवीन्द्र नारायण पहलवान

🌷🌷😊😊🌹🌹
मेरी नजर में

एक शब्द चाहिये जो एक लम्बी कविता बन सके। पहले तो समझ में नहीं आया कि केवल एक शब्द चाहिये जो दुनिया भर को समेट कर रख दे फिर चाहने पर उसे उसी तरह से अभिव्यक्त कर दे। लेकिन ध्यान से देखने पर पता चलता है कि एक एक शब्द ही है हर लाइन के लिये जो कविता में शब्द प्रतीक बन गया है और जो अपने संग स्मृति, कल्पना और चिन्तन एक साथ ले कर चलता है।
शब्द क्या अक्षरों का समूह भर है? शब्द क्या एक अभिव्यक्ति भर होता है? जो शब्द लिखे और पढ़े जा रहे हैं वे किसी भाषा की लिपि के भाग हैं। वास्तव में विश्व भर में विभिन्न भाषाओं में अक्षर अथवा लिपि केवल संकेत अथवा चिन्ह ही है। पानी को "पानी" लिख कर हमने संकेत बना लिया कि जब जल के अर्थ और भाव रूपी इस शब्द का उल्लेख हो तो हम पानी के भौतिक स्वरूप को ही समझें।
शब्दाद्वैतवाद के अनुसार शब्द ही ब्रह्म है। उसकी ही सत्ता है। सम्पूर्ण जगत शब्दमय है। शब्द की ही प्रेरणा से समस्त संसार गतिशील है। व्याकरण में शब्द की तीन शक्तियाँ है। आभिधा, लक्षणा और व्यंग्यना। कागज पर उतर कर वह जगत भर में विस्तार पाता है। भाव रूप में शब्द की अन्तरिम शक्ति सीधे मन और चित्त तक प्रवेश करती है।
मनुष्य के मन के तीन प्रमुख कार्य हैं’- स्मृति, कल्पना तथा चिन्तन लेकिन यदि मन को शब्द का माध्यम न मिले तो उसे अर्थवत्ता नहीं प्राप्त हो सकती। उसकी गति शब्द के घोड़े पर सवार हो कर ही प्राप्त होती है। जैसे "पहाड़" एक शब्द ही है जिसके आधार पर मन पर उसकी छबि उभर आती है। शब्द में सामर्थ्य है सम्पूर्ण अभिव्यक्ति की। शब्द अपनी अभिव्यक्ति के पूर्व चिंतन के रूप में होता है। अपनी उत्पत्ति काल में वह सूक्ष्म होता है पर बाहर आते-आते वह स्थूल बन जाता है। उपनिषद् 'शब्द' को वाणी के रूप में ग्रहण करता है। एक मंत्र में ईश्वर से प्रार्थना की जा रही है -- ॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठितमाविराविर्म एधि। वेदस्य म आणिस्थः श्रुतं मे मा प्रहासी:"। वाणी मेरे मन में प्रतिष्ठित हो और मन वाणी में। जो वाणी (शब्द) मैने सुने हैं वे मैं कभी नहीं भूलूँ।
कविता में इन्ही शब्दोँ की तलाश है जो जड़-चेतन प्रकृति को, मनुष्येतर प्राणियों को, आर्द्र और कोमल भावों को प्रकट कर सके, उनकी स्मृति पुनः पुनः लौट कर आती रहे, ऐसी कल्पनाएँ भी हृदय को आनन्दित करती है। कविता का आशय यह भी है कि ये सब चिन्तन में शामिल हो जाएँ तो ईश्वर की परम चेतना और जगत की चेतनता से हम जुड़े रहें। भावनाओं, रिश्तों और उनकी अनुभूतियाँ जाग्रत रहे।

संगीतकार श्री मोहन शर्मा का संक्षिप्त परिचय :

मोहन शर्मा- एक परिचय
1. नाम- पंडित मोहन शर्मा
2. पिता- स्व. पंडित पुरुषोत्तम जी शर्मा
3. शिक्षा- एम. ए. म्यूजिक खैरागढ़ विश्वविद्यालय( गायन )
4. कार्य-   संस्थापक एवं डायरेक्टर नाद ब्रह्म म्यूज़िक एन्ड     
               डांस  इंस्टीट्यूट इंदौर।
5. अन्य- संगीत के द्वारा विभिन्न रोगों का उपचार एवं
             कई रोगों का सफलता पूर्वक उपचार। विशेष रूप से मधुमेह,  माइग्रेन शुरुआती अस्थमा  मानसिक विकलांगता, और थायराइड का सफल उपचार किया है। संगीत के द्वारा, याददाश्त में आई कमी भी दूर की है।
कविता शायरी लेखन
6. अन्य गतिविधियों - सदस्य इंडियन ऑथर्स एसोसिएशन
                               सदस्य रोटरी काव्य मंच इंदौर,
                               सदस्य अहिसास ( महाराष्ट्र )
                              प्रेसिडेंट इलेक्ट वर्ष 2020-21  रोटरी क्लब इंदौर विनायकम
6. श्रव्य कैसेट- स्वास्थ्य सरगम, पूर्व कलेक्टर श्री मनोज
                      श्रीवास्तव रचित गीतों का एल्बम
                      टुकड़े टुकड़े दिन, अरविंद आश्रम इंदौर
                      के भजनों का एल्बम ऋतायन, और अन्य
                      भजन एल्बम श्याम तेरा नाम।
वीडियो अल्बम इंदौर के वरिष्ठ कवि डॉ. रवीन्द्र नारायण पहलवान के गीतों का वीडियो अल्बम बनाया है।
7. सम्मान- चैतन्यधाम मंडल मंडलेश्वर, इस्कॉन मंदिर मुम्बई एवं
                 श्री अरविंद सोसायटी इंदौर द्वारा संगीत की
                 दीर्घ कालीन सेवाओं के लिए सम्मानित,  
                 संस्था इवेंट इंदौर द्वारा साहित्य की सेवाओं के
                 लिये  सन 2018 में पत्रकार खुशवंत सिंह
                 सम्मान  से सम्मानित। दिनकर सृजन संस्थान    के अंतर्गत  वरिष्ठ कवि स्वर्गीय दिनकर सोनवाल कर जी की कविताओं को स्वरबद्ध करके गायन करने के कारण वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार वेदप्रताप वैदिक जी द्वारा उज्जैन में सम्मानित सन 2018। अखिलभारतीय अग्निशिखा काव्यमंच द्वारा सम्मानित सन 2019

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जुगलबन्दी

उक्त कविता को सुप्रसिद्ध संगीतकार पण्डित श्री मोहन शर्मा ने मधुर सुरों से सजाया है। संगीत रचना राग 'झिंझोटी' पर आधारित है। यह राग श्रृंगार रस प्रधान राग है। चंचल राग होने से न सिर्फ गायक और श्रोता ही नहीं इसे साज संगत देने वाले कलाकार भी बजाते बजाते उसमें मस्त हो जाते हैं। कुल मिला कर शब्दों, भावों और स्वरों की त्रिवेणी बहुत सुन्दर बन पड़ी है।

रामनारायण सोनी
०५.०४.२०

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